दिल्ली में मोदी-योगी की ‘महाबैठक’: यूपी में कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट तेज, मकर संक्रांति के बाद मिल सकते हैं नए मंत्री

Saransh Kanaujia
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर मुलाकात की। लगभग एक घंटे तक चली इस उच्च-स्तरीय बैठक के बाद उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में विस्तार और बड़े फेरबदल की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।

बैठक के मुख्य बिंदु और संभावित एजेंडा

कैबिनेट में खाली पद: वर्तमान में योगी सरकार में मंत्रियों के 6 पद खाली हैं। सूत्रों के अनुसार, इन पदों को भरने और कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल को लेकर प्रधानमंत्री के साथ चर्चा हुई है।

नए चेहरों की एंट्री: माना जा रहा है कि मिशन 2027 को ध्यान में रखते हुए जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी समेत कई दिग्गज नामों की चर्चा है।

मकर संक्रांति का मुहूर्त: कयास लगाए जा रहे हैं कि 14 जनवरी (मकर संक्रांति) के बाद खरमास समाप्त होते ही नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है।

संगठनात्मक बदलाव: मुख्यमंत्री ने भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और जेपी नड्डा से भी मुलाकात की है, जो संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल का संकेत है।

मिशन 2027 की तैयारी

इस बैठक को केवल कैबिनेट विस्तार तक ही सीमित नहीं देखा जा रहा है। 2026 की शुरुआत में हुई यह मुलाकात आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। बैठक में उत्तर प्रदेश की विकास योजनाओं, जैसे ‘यूपी दिवस’ (24 जनवरी) की तैयारियों और ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ के रोडमैप पर भी चर्चा हुई है।

“प्रधानमंत्री जी का मार्गदर्शन ‘नए उत्तर प्रदेश’ की विकास यात्रा को और अधिक गति प्रदान करने हेतु सदैव नवीन ऊर्जा का संचार करता है।”

— योगी आदित्यनाथ (सोशल मीडिया पोस्ट से)

यूपी कैबिनेट विस्तार: संभावित चेहरों की सूची

नाम वर्तमान भूमिका / क्षेत्र संभावित कारण
भूपेंद्र सिंह चौधरी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष (पश्चिमी यूपी) जाट समुदाय को साधने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पकड़ मजबूत करने के लिए।
डॉ. महेंद्र सिंह पूर्व मंत्री / संगठन दिग्गज संगठन में लंबे अनुभव और प्रशासनिक पकड़ के कारण वापसी संभव।
आकाश सक्सेना विधायक, रामपुर आजम खान के गढ़ में जीत दर्ज करने का इनाम और युवाओं के बीच संदेश।
राजेश चौधरी विधायक, मथुरा (ब्रज क्षेत्र) ब्रज क्षेत्र के समीकरण और युवा ब्राह्मण चेहरे के रूप में।
मुकुट बिहारी वर्मा पूर्व मंत्री (अवध क्षेत्र) ओबीसी वोट बैंक और अवध क्षेत्र में अनुभव को प्राथमिकता।
शलभ मणि त्रिपाठी विधायक, देवरिया (पूर्वांचल) पूर्वांचल में ब्राह्मण चेहरे और मुखर छवि के कारण।

विस्तार के पीछे का मुख्य फोकस

क्षेत्रीय संतुलन: पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के उन हिस्सों को प्रतिनिधित्व देना जहाँ पिछले चुनावों में प्रदर्शन कमजोर रहा था।

जातिगत समीकरण: ओबीसी और दलित समुदायों के प्रभावशाली चेहरों को शामिल कर 2027 के लिए ‘सोशल इंजीनियरिंग’ को पुख्ता करना।

कब हो सकता है शपथ ग्रहण?

चूंकि अभी खरमास चल रहा है, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है, इसलिए अधिकांश जानकारों का मानना है कि 15 जनवरी (मकर संक्रांति) के बाद राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जा सकता है।

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