ईरान में सत्ता संघर्ष: क्या विदेश मंत्री अब्बास अराघची की कुर्सी खतरे में है?

Saransh Kanaujia
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तेहरान । शुक्रवार, 1 मई 2026

ईरान के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों भारी तनाव का माहौल है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और संसद अध्यक्ष (स्पीकर) मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के बीच एक दुर्लभ एकजुटता देखी जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य विदेश मंत्री अब्बास अराघची को उनके पद से हटाना है। यह विवाद न केवल प्रशासनिक है, बल्कि ईरान की भविष्य की कूटनीति और सेना के बढ़ते दखल से भी जुड़ा है।

विवाद की जड़: कूटनीति या सैन्य दबाव?

रिपोर्ट्स का दावा है कि अराघची पर राष्ट्रपति की नीतियों को लागू करने के बजाय रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर अहमद वाहिदी के “सहायक” के रूप में काम करने का आरोप है।

  • बिना बताए फैसले: सूत्रों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में अराघची ने कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम राष्ट्रपति पेजेश्कियान को जानकारी दिए बिना उठाए हैं।

  • सैन्य निष्ठा: आरोप है कि वह पूरी तरह से अहमद वाहिदी के निर्देशों पर चल रहे हैं, जिससे निर्वाचित सरकार की शक्ति कमजोर हो रही है।

पाकिस्तान वार्ता और आंतरिक फूट

ईरान के भीतर चल रही इस खींचतान का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं पर पड़ा है। 12 अप्रैल को पाकिस्तान में अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत का ईरान द्वारा अचानक छोड़ा जाना इसी फूट का नतीजा था। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के बीच एक राय न बन पाने के कारण वार्ता विफल रही, जिससे ईरान की अंतरराष्ट्रीय छवि को धक्का लगा है।

युद्ध के बाद का ‘नया नेतृत्व’

28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों के बाद ईरान के कई शीर्ष नेताओं की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद से देश की कमान अपेक्षाकृत नए और कम अनुभवी नेतृत्व के हाथों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कई बार दावा किया है कि तेहरान में वर्तमान में “शक्ति का केंद्र” एक नहीं है, जिसका लाभ इजरायल और अमेरिका उठा रहे हैं।

स्पष्टीकरण

हालांकि इजरायली और पश्चिमी मीडिया (जैसे यरुशलम पोस्ट और ईरान इंटरनेशनल) इस फूट को ‘चरम’ पर बता रहे हैं, ईरानी सरकारी मीडिया अभी भी इसे “दुश्मनों का दुष्प्रचार” करार दे रहा है। ईरान का दावा है कि उनका नेतृत्व एकजुट है और असली मतभेद अमेरिकी प्रशासन के भीतर हैं।

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