ईरान में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन: खामेनेई की मौत के बाद 3 सदस्यीय ‘लीडरशिप काउंसिल’ ने संभाली कमान

Saransh Kanaujia
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तेहरान. अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों के बाद ईरान की सत्ता में ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बदलाव हुआ है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद, देश में अंतरिम शासन व्यवस्था लागू कर दी गई है। ईरानी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, वरिष्ठ धार्मिक नेता अलीरेजा अराफी को नई ‘लीडरशिप काउंसिल’ में ज्यूरिस्ट सदस्य नियुक्त किया गया है, जो अंतरिम रूप से सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारियां निभाएंगे।

सत्ता का नया समीकरण: तीन दिग्गजों के हाथ में कमान

जब तक ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ (Assembly of Experts) नए स्थायी सुप्रीम लीडर का चुनाव नहीं कर लेती, तब तक देश के सभी रणनीतिक, सैन्य और धार्मिक फैसलों का नियंत्रण एक तीन सदस्यीय परिषद के पास रहेगा:

  • अलीरेजा अराफी: अंतरिम ज्यूरिस्ट और धार्मिक प्रमुख।

  • मसूद पेजेशकियन: ईरान के राष्ट्रपति।

  • गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई: मुख्य न्यायाधीश।

40 दिनों का राष्ट्रीय शोक और हाई अलर्ट

सरकार ने खामेनेई के सम्मान में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। वर्तमान में तेहरान सहित सभी प्रमुख शहरों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त कर दिया गया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे “मुस्लिम जगत के खिलाफ युद्ध की घोषणा” करार दिया है।

ईरान का पलटवार: सात देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमला

खामेनेई की मौत के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार:

  • मध्य-पूर्व के सात देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन्स से निशाना बनाया गया है।

  • इजरायल पर कई चरणों में मिसाइल हमले किए गए हैं, जिससे क्षेत्र में पूर्ण युद्ध (Full-scale War) की आशंका बढ़ गई है।

वैश्विक चिंताएं

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम न केवल मध्य-पूर्व, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा है। कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल और वैश्विक कूटनीतिक तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) सहित कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है।

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