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ईडी के रिलायंस ग्रुप पर छापेमारी के बाद लुढ़के कंपनी के शेयर के दाम

Saransh Kanaujia
4 Min Read

मुंबई. रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रा के शेयरों में गुरुवार को 5 परसेंट तक की गिरावट आई. इन दोनों ही कंपनियों के शेयरों में लोअर सर्किट लग गया. दरअसल, आज प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से जुड़ी 35 से ज्यादा ठिकानों पर छापामारी की. यस बैंक लोन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच के सिलसिले में यह कार्रवाई की गई. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2017-2019 में यस बैंक से लोन के रूप में मिले 3000 करोड़ रुपये शेल कंपनियों और ग्रुप की दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किया गया. जांच में यस बैंक के अधिकारियों को भी रिश्वत देने की बात सामने आई है, जिसमें बैंक के प्रमोटर भी शामिल हैं.

ED की छापामारी का कंपनी के शेयर पर असर

इस खबर के बाद बीएसई पर रिलायंस पावर का शेयर 5 परसेंट या 3.14 रुपये गिरकर 59.70 रुपये पर आ गया. वहीं, 4.99 परसेंट की गिरावट के साथ रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का शेयर भी 360.05 रुपये के लोअर सर्किट पर पहुंच गया. ईडी की दिल्ली स्थित यूनिट मामले की जांच कर रही है. ईडी के सूत्रों का कहना है कि टीम यस बैंक के दिए गए 3000 करोड़ रुपये के लोन के अवैध डायवर्जन के आरोपों की जांच कर रही है. हालांकि, इस बीच रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर दोनों ने दावा किया कि इस कार्रवाई का कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, व्यावसायिक संचालन, शेयरहोल्डर्स, कर्मचारियों पर कोई असर नहीं होगा.

ED की कार्रवाई पर रिलायंस पावर की सफाई

कंपनी ने फाइलिंग में जानकारी दी कि मीडिया रिपोर्ट्स में शायद रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) या रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) से जुड़े लेनदेन के आरोपों की बात की जा रही है, जो 10 साल से भी ज्यादा पुराने हैं. कंपनी ने कहा कि रिलायंस पावर एक अलग और स्वतंत्र रूप से लिस्टेड कंपनी है, जिसका RCOM या RHFL से कोई व्यवसायिक या वित्तीय लेनादेना नहीं है. RCOM पिछले 6 सालों से दिवालियापन और ऋण शोधन प्रक्रिया (Insolvency and Bankruptcy Code, 2016) से गुजर रही है. RHFL से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूरी तरह सुलझ चुका है. इस तरह के कुछ अन्य आरोप अभी भी माननीय प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (Securities Appellate Tribunal) में विचाराधीन हैं.

फाइलिंग में कहा गया कि अनिल डी. अंबानी रिलायंस पावर के बोर्ड में नहीं हैं इसलिए RCOM या RHFL के खिलाफ की गई किसी भी कार्रवाई का रिलायंस पावर के मैनेजमेंट या ऑपरेशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. रिलायंस पावर अपने बिजनेस प्लान पर फोकस करती रहेगी और सभी हितधारकों के लिए वैल्यू क्रिएट करने के प्रति प्रतिबद्ध रहेगी. सेबी (SEBI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) कॉर्पोरेट लोन पोर्टफोलियो वित्त वर्ष 2017-18 के 3,742 करोड़ से बढ़कर 2018-19 में 8,670 करोड़ रुपये तक पहुं गया. इससे अलावा, SBI ने 10 नवंबर 2020 को RCom और अनिल अंबानी को ‘फ्रॉड’ घोषित कर 5 जनवरी 2021 को CBI में शिकायत भी दर्ज कराई थी.

साभार : एबीपी न्यूज

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