धर्मांतरण पीड़ितों की मदद के लिए लखनऊ में शुरू हुई ‘सनातन हेल्पलाइन’

Saransh Kanaujia
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से धर्मांतरण के खिलाफ बड़ी पहल सामने आई है. विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने आज सनातन हेल्पलाइन की औपचारिक शुरुआत की. संस्था ने दावा किया है कि लगातार सामने आ रहे अवैध धर्मांतरण के मामलों को देखते हुए यह हेल्पलाइन शुरू की गई है, जिससे पीड़ित सीधे संपर्क कर सकें. पिछले दिनों विश्व हिंदू रक्षा परिषद द्वारा कराए गए धर्म संसद में सनातन हेल्पलाइन खोलने का प्रस्ताव पास हुआ था. हेल्पलाइन की खास बात यह है कि इसमें राज्यवार डेस्क बनाई गई है. पुरुषों और महिलाओं की अलग-अलग टीमें तैनात हैं जो पीड़ितों की कॉल रिसीव कर रही हैं. खासतौर पर पीड़ित महिलाओं की बात सुनने और उन्हें समझाने का काम महिला कर्मियों को सौंपा गया है ताकि वे सहज होकर अपनी बात रख सकें.

छांगुर और आगरा केस को लेकर स्पेशल लाइन

विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने बलरामपुर के चर्चित छांगुर उर्फ जलालुद्दीन प्रकरण और आगरा धर्मांतरण केस से जुड़े पीड़ितों के लिए अलग से विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं. इस हेल्पलाइन मे कुल मिलाकर 10 हेल्पलाइन नंबर सक्रिय किए गए हैं.

लखनऊ से पहला रेस्क्यू

हेल्पलाइन शुरू होते ही पहला मामला लखनऊ के मोहनलालगंज से सामने आया. परिषद की टीम ने एक युवती को धर्मांतरण के जाल से निकालकर रेस्क्यू किया. संस्था का दावा है कि युवती को बरगलाया जा रहा था, लेकिन समय रहते हस्तक्षेप कर उसे सुरक्षित निकाला गया.

जाकिर नाईक और शाहीन बाग कनेक्शन का दावा

विश्व हिंदू रक्षा परिषद के अध्यक्ष गोपाल राय ने बताया कि आगरा और आसपास के क्षेत्रों से उन्हें लगातार फोन कॉल आ रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि कई पीड़ितों ने बताया कि उन्हें जाकिर नाईक के वीडियो दिखाकर प्रभावित किया गया और शाहीन बाग में हुए एनआरसी के प्रोटेस्ट के दौरान जो लोग सक्रिय थे वह इस धर्मांतरण केस में भी सक्रिय हैं. परिषद ने कहा है कि इस कॉल सेंटर के जरिए वे धर्मांतरण के खिलाफ लोगों की आवाज को सुनेंगे और उनको उचित फोरम पर उठाकर लोगों की मदद करेंगे.

साभार : एबीपी न्यूज

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article