सुप्रीम कोर्ट ने लिया निर्णय, हाईकोर्ट में तदर्थ जज भी कर सकेंगे पीठ की अध्यक्षता

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2021 के फैसले में संशोधन करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जिन्हें बाद में आपराधिक मामलों के लंबित मामलों को निपटाने के लिए तदर्थ न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया हो, एकल या खंडपीठ की अध्यक्षता कर सकते हैं।

शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से हाईकोर्ट के पूर्व जजों को तदर्थ न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के संबंध में एक नीति बनाने या मौजूदा नीति में सुधार करने को भी कहा। पीठ ने कहा, (हमारे पास) न्यायिक प्रतिभा का एक विशाल भंडार है। वे 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं और उनके अनुभव का उपयोग लंबित मामलों से निपटने के लिए किया जा सकता है।

57 लाख मामले लंबित
पूर्व सीजेआई जस्टिस (से.) एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ ने 20 अप्रैल, 2021 को विभिन्न हाईकोर्ट में लगभग 57 लाख मामलों के लंबित होने का संज्ञान लिया और इसे विस्फोट करार दिया। उनके फैसले ने लंबित आपराधिक मामलों को निपटाने के लिए दो से तीन साल की अवधि के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों को तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त करने का मार्ग प्रशस्त किया। इस फैसले में तदर्थ जजों के रूप में नियुक्ति के लिए पीठ ने कई दिशा-निर्देश जारी किए थे।

पीठ ने कहा था कि तदर्थ जज, नियमित जज की अध्यक्षता वाली पीठ में बैठेंगे और लंबित आपराधिक अपीलों का फैसला करेंगे। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने बृहस्पतिवार को दिए आदेश के एक पहलू में संशोधन करते हुए कहा कि तदर्थ न्यायाधीश, एकल जज पीठ की अध्यक्षता कर सकते हैं और उन्हें खंडपीठ में भी नियमित न्यायाधीश का कनिष्ठ सहयोगी नहीं बनाया जाना चाहिए। संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, स्थिति और आवश्यकता के अनुसार, एक नियमित और एक तदर्थ न्यायाधीश या यहां तक कि दो तदर्थ न्यायाधीशों वाली खंडपीठ का गठन कर सकते हैं।

जूनियर के अधीन बैठने में शर्मिंदगी महसूस होती है
सीजेआई ने कहा, कई पूर्व न्यायाधीशों ने मुझसे बात की है। वे सेवानिवृत्त हैं और काम करने के इच्छुक हैं, लेकिन खंडपीठ में जूनियर के रूप में बैठने में उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है। हम इस पर विचार कर रहे हैं कि क्या हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, मौजूदा न्यायाधीश को पूर्व न्यायाधीश के साथ बेंच पार्टनर के रूप में बैठने के लिए मना सकते हैं।

जजों की स्वीकृत संख्या के 10% तक हो सकते हैं तदर्थ न्यायाधीश
सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को न्यायालय की कुल स्वीकृत संख्या के 10 प्रतिशत तक तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति की अनुमति दी थी। पीठ ने तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति पर 20 अप्रैल, 2021 के अपने फैसले में लगाई गई कुछ शर्तों में ढील दी थी।

न्यायिक आदेश से नहीं, आंतरिक रूप से हो समाधान- केंद्र
अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने कहा कि इसका समाधान न्यायिक आदेश नहीं बल्कि हाईकोर्ट में आंतरिक रूप से ही किया जा सकता है। इसपर सीजेआई ने कहा, यदि दो तदर्थ न्यायाधीश हैं, तो मुख्य न्यायाधीश उनकी डिवीजन बेंच बनाने का निर्णय लेंगे।

हम मुख्य न्यायाधीश पर यह अधिकार भी छोड़ते हैं कि वे जहां भी आवश्यक हो, एक मौजूदा न्यायाधीश और एक तदर्थ न्यायाधीश की बेंच का गठन करें और दोनो जजों की स्वीकार्यता के अनुसार यह तय करें कि बेंच की अध्यक्षता कौन करेगा। तदर्थ न्यायाधीशों की एकल पीठ के गठन में कोई बाधा नहीं होगी। इसके साथ ही सीजेआई ने 2021 के मुख्य निर्णय में भी उचित संशोधन का आदेश दिया।

साभार : अमर उजाला

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