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नेपाल में हिंसा के कारण 20 की मौत, गृह मंत्री ने दिया इस्तीफा

Saransh Kanaujia
4 Min Read

काठमांडू. नेपाल में ह‍िंसा कई शहरों में फैलती जा रही है. सरकार के ख‍िलाफ हजारों लोग सड़कों पर हैं. अब तक 20 से ज्‍यादा लोगों की मौत हो चुकी है, मगर युवाओं का गुस्‍सा थम नहीं है. रात में भी सड़कें युवाओं से खचाखच भरी हैं. काठमांडू, पोखरा, झापा, बुटवल, चितवर, नेपालंगज हो या विराटनगर… एक ओर सेना और पुल‍िस के जवान बंदूक ताने खड़े हैं तो दूसरी ओर हजारों की संख्‍या में युवा लाठी डंडों के साथ डटे हुए हैं. उनकी बस एक ही डिमांड है, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली इस्‍तीफा दें. इन घटनाओं के बीच नेपाल के गृह मंत्री रमेश लेखक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कहा कि जान-माल की हानि के लिए उन्हें नैतिक जिम्मेदारी महसूस होती है और इस कारण उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया.

गृहमंत्री के इस्‍तीफे के बाद भी युवाओं का गुस्‍सा नहीं थम रहा है. पुल‍िस को देखते ही गोली मारने के आदेश द‍िए गए हैं, इसके बावजूद वे हटने को तैयार नहीं. पुल‍िस फायरिंग करती है, आंसू गैस का इस्‍तेमाल करती है, लाठ‍ियों से पीटती है, इसके बावजूद लोग सड़कों पर फ‍िर जमा हो जाते हैं. उधर, विपक्षी दल भी एकजुट होने लगे हैं. केपी शर्मा ओली को पद से हटाने की तैयार‍ियां शुरू हो गई हैं. विपक्ष का कहना है क‍ि केपी शर्मा ओली देश को आग में झोंक रहे हैं.

क्‍या कह रहे नेपाल के लोग

नेपाल के बुद्ध‍िजीवी, लेखक, डॉक्टर, कलाकार और पूर्व अफसर चिंतित दिख रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार और राजनीतिक दलों को युवाओं की नाराजगी को हल्के में नहीं लेना चाहिए. ये विरोध सिर्फ अचानक नहीं हुआ, बल्कि वर्षों की निराशा और गुस्से का नतीजा है. भ्रष्टाचार, खराब प्रशासन, सत्ता का दुरुपयोग और लगातार बढ़ती घमंड की वजह से युवा अब सड़कों पर उतर रहे हैं. काठमांडू पोस्‍ट से बात करते हुए डॉ. अरुण सायमी ने कहा, नेता सोचते हैं कि संसद में बहुमत होने पर वे कुछ भी कर सकते हैं. लेकिन आज के युवा किसी के गुलाम नहीं हैं. उनका सुझाव है कि सरकार तुरंत सोशल मीडिया पर लगी पाबंदी हटाए और युवाओं की आवाज को सुने.

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इस हिंसा और युवा नाराजगी को गंभीरता से लेना होगा. यह सिर्फ कानून और व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और युवाओं के हक का भी सवाल है. युवाओं की मांगें साफ हैं क‍ि भ्रष्टाचार कम करें, प्रशासन में पारदर्शिता लाएं और सोशल मीडिया जैसी स्वतंत्रता को सुरक्षित रखें. अगर सरकार ने इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया, तो विरोध और बढ़ सकता है. युवाओं का कहना है कि वे किसी भी अत्याचार या पाबंदी को नहीं मानेंगे.

साभार : न्यूज18

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