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एफटीआईआई ने फिल्म एप्रिसिएशन कोर्स (मध्य वर्ष 2025) के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई

Saransh Kanaujia
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) ने पुणे में आयोजित किए जा रहे अपने प्रमुख फिल्म एप्रिसिएशन कोर्स (मध्य वर्ष 2025) के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने की घोषणा की है, जिसका आयोजन 23 जून से 11 जुलाई, 2025 तक किया जा रहा है। आवेदन जमा करने की संशोधित अंतिम तिथि अब 15 जून, 2025 (शाम 6:00 बजे) है।

यह विस्तार देश भर के फिल्म प्रेमियों की भारी रुचि के बाद किया गया है और इसका उद्देश्य अधिक इच्छुक प्रतिभागियों को शामिल करना है जो 7 जून की पिछली समय सीमा से चूक गए थे। एफटीआईआई और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम – भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार द्वारा संयुक्त रूप से संचालित यह पाठ्यक्रम, एफटीआईआई की व्यापक लोकसंपर्क पहल का हिस्सा है जिसका उद्देश्य पूरे भारत में फिल्म शिक्षा की पहुंच को लोकतांत्रिक बनाना है।

एक गहन, पूर्णकालिक प्रोग्राम के रूप में यह पाठ्यक्रम प्रतिभागियों को सिनेमा के सौंदर्यशास्त्र, इतिहास और भाषा का एक संरचित परिचय प्रदान करता है। इसमें व्याख्यान, स्क्रीनिंग और चर्चाएं शामिल हैं, जिनके सत्र सप्ताहांत को छोड़कर प्रतिदिन सुबह 9:30 बजे से शाम 8:30 बजे तक आयोजित किए जाते हैं। पाठ्यक्रम की एक विशेषता प्रतिभागियों को 35 मिमी और डिजिटल दोनों प्रारूपों में सिनेमा का अनुभव प्राप्त करने का अवसर है।

पाठ्यक्रम में सिनेमा को कला के रूप और संचार के माध्यम दोनों प्रकारों से दर्शाया गया है, जिसमें भारतीय और विश्व सिनेमा परंपराओं पर जोर दिया गया है। प्रतिभागी चुनिंदा क्लासिक- फिक्शन, नॉन-फिक्शन और डॉक्यूमेंट्री- के साथ गहन विश्लेषण के साथ जुड़ेंगे। प्रसिद्ध फिल्म निर्माताओं के साथ अतिथि परस्पर बातचीत कार्यक्रम का एक अभिन्न अंग होगी। एफटीआईआई के मुख्य संकाय के साथ-साथ प्रतिष्ठित अतिथि संकाय द्वारा व्याख्यान दिए जाएंगे।

इस कोर्स का समन्वय एफटीआईआई के संकाय सदस्य इंद्रनील भट्टाचार्य और वैभव अबनावे द्वारा किया जाता है। यह पाठ्यक्रम शिक्षकों, मीडिया से जुड़े व्यक्तियों, शोधकर्ताओं, फिल्म सोसायटी के सदस्यों, मीडिया में काम करने वाले सरकारी अधिकारियों और पूरे भारत के उत्साही सिनेमा प्रेमियों के लिए लक्षित है।

सिनेमा और मीडिया से जुड़े क्षेत्रों में रुचि और अनुभव के आधार पर आवेदनों की जांच की जाएगी। बाहरी प्रतिभागियों के लिए सीमित संख्या में छात्रावास उपलब्ध होंगे, जिसमें दिव्यांग और महिला उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रतिभागियों से अपेक्षा की जाती है कि वे पुणे में अपनी यात्रा, ठहरने और भोजन की व्यवस्था स्वयं करें।

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