ईडी ने एसडीपीआई के 12 ठिकानों पर मारा छापा

Saransh Kanaujia
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नई दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने राजस्थान की राजधानी जयपुर में छापेमारी की. यह कार्रवाई सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से जुड़े ठिकानों पर हुई. ऐसी ही रेड देशभर के कुल 12 स्थानों पर की गई. इसमें SDPI मुख्यालय सहित दिल्ली में दो स्थान, केरल का तिरुवनंतपुरम और मलप्पुरम, कर्नाटक का बेंगलुरु, आंध्र प्रदेश का नंद्याल, महाराष्ट्र का ठाणे, तमिलनाडु का चेन्नई, झारखंड का पाकुड़, पश्चिम बंगाल का कोलकाता, उत्तर प्रदेश का लखनऊ शामिल था. ये ऑपरेशन एसडीपीआई की गतिविधियों की चल रही जांच का हिस्सा था.

2022 में भी हुई थी छापेमारी

एसडीपीआई, 2009 में स्थापित एक राजनीतिक दल है जिसकी कई भारतीय राज्यों में उपस्थिति है. वर्ष 2022 में भी कई राज्यों में एसडीपीआई और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के कार्यालयों पर समन्वित छापे मारे गए, और कई गिरफ्तारियां भी हुईं. मौजूदा छापे राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों में शामिल होने के संदेह वाले संगठनों की ईडी की चल रही जांच को रेखांकित करते हैं.

एमके फैजी की गिरफ्तारी के बाद एक्शन

केंद्रीय एजेंसी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट (IGI Airport) से एसडीपीआई अध्यक्ष मोइदीन कुट्टी के उर्फ ​​एमके फैजी की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद हुई है. ईडी ने पहले जारी एक बयान के माध्यम से यह भी बताया था कि एसडीपीआई अपने दैनिक कार्यों, नीति निर्माण, चुनाव अभियान के लिए उम्मीदवारों के चयन के लिए प्रतिबंधित संगठन पीएफआई पर निर्भर थी.

6 दिन तक ईडी हिरासत में रहेगी फैजी

ईडी ने यह भी कहा है कि एसडीपीआई पीएफआई का एक राजनीतिक मोर्चा है और फैजी 2018 से एसडीपीआई का राष्ट्रीय अध्यक्ष है. फैजी को 3 मार्च को गिरफ्तार किया गया था. मंगलवार को उसे दिल्ली की एक विशेष अदालत ने छह दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है.

टेरेरिस्ट को फाइनेंसिंग के लिए जुटाया पैसा

ईडी ने एनआईए की कोच्चि शाखा द्वारा 7 अगस्त 2013 को दर्ज की गई एक एफआईआर और 13 अप्रैल 2022 को इसकी दिल्ली शाखा द्वारा एक और एफआईआर के साथ-साथ अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा दर्ज की गई विभिन्न एफआईआर के आधार पर पीएमएलए के तहत पीएफआई और अन्य के खिलाफ जांच शुरू की. जांच से पता चला है कि PFI के पदाधिकारी, सदस्य और कैडर पूरे भारत में आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने और वित्तपोषण के लिए बैंकिंग चैनलों, हवाला, दान के माध्यम से भारत और विदेशों से साजिश रच रहे थे और धन जुटा रहे थे.’

साभार : एनडीटीवी

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