आरसीपी सिंह ने बनाई अपनी नई पार्टी ‘आप सबकी आवाज’

Saransh Kanaujia
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पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के काफी करीबी रहे रामचंद्र प्रसाद सिंह उर्फ आरसीपी सिंह (RCP Singh) ने गुरुवार (31 अक्टूबर) को अपनी नई पार्टी की घोषणा कर दी है. आरसीपी सिंह ने अपनी पार्टी के बारे में बताते हुए कहा कि आज दीपावली है और दीप आशा जगाता है, तो मैंने अपनी पार्टी का जो नाम रखा है शॉर्ट में नाम ही ‘आसा’ है और इसका फुलफॉर्म ‘आप सबकी आवाज’ है.

तीन रंगों का होगा पार्टी का झंडा

आरसीपी सिंह ने बताया कि पार्टी का झंडा आयताकार और तीन रंगों का होगा, सबसे ऊपर हरा रंग होगा, बीच में पीला रंग होगा और सबसे नीचे नीला होगा. यह हमारे पार्टी का झंडा होगा और बीच में जो पीला रंग है उसी में जब चुनाव आयोग हमें चिह्न देगा तो वह बीच में काले रंग में अंकित होगा. हमारी पार्टी का जो संविधान है वह अन्य पार्टियों के संविधान से अलग होगा.

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के प्रति शपथ लेनी होती है, जो भारतीय संविधान की मूल भावना है. देश की एकता अखंडता सबको उसमें समाहित करते हुए जो हमारा प्रिय मूल है संविधान का, उसमें से जितनी महत्वपूर्ण भावनाएं हैं, जो सिद्धांत हैं, उसको हम लोगों ने अपने पार्टी के संविधान में शामिल किया है. 2025 का जो चुनाव होगा उसमें हमारे साथी जो मजबूती से लड़ना चाहते हैं वह चुनाव लड़े. हमारे पास अभी 140 मजबूत उम्मीदवार तैयार हैं.

आरसीपी सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट शराबबंदी को फेल बताया और कहा कि किसी के खान-पान पर आप रोक नहीं लगा सकते हैं. हम लोग शराब रोकने के लिए जनजागरण का कार्यक्रम करेंगे. शराबबंदी से सरकार का कई हजार करोड़ का लॉस है.  कितने ग्रामीण इलाके हैं, जहां उनके बच्चे उनके लोग जो हैं जेल में चले गए तो इसमें सुधार की आवश्यकता है.

सीएम नीतीश के शराबबंदी को बताया फेल

उन्होंने कहा कि हमने पहले भी कहा और आज भी कह रहा हूं, मैं मुख्यमंत्री से निवेदन करना चाहूंगा कि पूरी गंभीरता के साथ एक हाई लेवल की कमेटी गठित की जाए, जिस उद्देश्य से आपने शराबबंदी बिहार में लागू की थी. वह कहां तक सफल हो पाई है, क्या-क्या चीज और क्या किया जाना चाहिए, जो मंशा है वह भी पूरी हो सके. आगे आरसीपी सिंह ने कहा कि अभी बिहार के बारे में जो इमेज है, कोई आज प्रोग्राम करने के लिए बिहार में आता नहीं है. लोग रांची और बनारस चले जाते हैं. इतने वर्षों में बिहार में कितने होटल बने हैं. अगर फाइव स्टार होटल के बारे में चर्चा करिएगा तो शायद ही कोई बना है, तो पहले यहां माहौल बनाना पड़ेगा.

साभार : एबीपी न्यूज़

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